जानिये स्मार्टफोन से जुड़े कुछ मिथक और उनकी सच्चाई!

स्मार्टफोन से जुड़े कुछ मिथक और उनकी सच्चाई!

मौजूदा दौर में स्मार्टफ़ोन हर व्यक्ति के लिए जरुरी हो गया है. एक ताज़ा सर्वे में यह बात सामने आई है की लोग अब अपने पार्टनर से ज्यादा तरजीह स्मार्टफ़ोन को देते हैं. बिना स्मार्टफ़ोन के हम आज की दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते. पर जैसा की हर चीज़ के साथ होता हैठीक उसी तरह स्मार्टफ़ोन के साथ भी कुछ मिथक या भ्रांतियाँ जुडी हुयी है. हम से ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफ़ोन को लेकर मन में काफी सारे भ्रम पाले रखते हैं. जैसे की हम में से ज्यादातर लोग यह सोचते हैं की फ़ोन को ज्यादा चार्ज करने से उसकी बैटरी खराब हो जाएगी. तो कुछ को लगता है की डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए स्क्रीनगार्ड या फिर बेक कवर जरूरी है. और साथ ही कुछ लोग को लगता है की स्मार्टफ़ोन का कैमरा जितना ज्यादा मेगापिक्सेल का होगाफोटो उतनी ही अच्छी आएगी...लेकिन ये सब कहने की बाते हैं..असलियत में होता कुछ और ही है. तो चलिए जानते हैं स्मार्टफ़ोन से जुड़े कुछ मिथकों और उनकी सच्चाई के बारे में –

स्मार्टफोन से जुड़े मिथक एवं उनकी सच्चाई
स्मार्टफोन से जुड़े मिथक एवं उनकी सच्चाई 

वायरस का खतरा – आज के टेक्नोलॉजी वाले युग में साइबर अपराध तेज़ी से बढ़ रहे हैं और हाल ही के दिनों में इन्टरनेट यूजरस पर कई तरह के वायरस अटैक हुए हैं. स्मार्टफ़ोन में Android ऑपरेटिंग सिस्टम वायरस के लिए कुछ ज्यादा ही बदनाम है और लोगो का मानना है की वायरस का सबसे ज्यादा शिकार एंड्राइड फ़ोन ही होते हैं लेकिन अगर आप Unknown Sources से कोई फाइल या App डाउनलोड करने के बजाय गूगल प्ले स्टोर का इस्तेमाल करे तो आप अपने डिवाइस को वायरस से सुरक्षित रख सकते हैं.

एंटी-वायरस एप्प जरुरी है –  आजकल आपको App Store पर लाखों Anti Virus और Malware App मिल जायेंगे जो आपके फ़ोन को वायरस से सुरक्षित रखने का दावा करते हैंऔर बहुत से लोग ऐसे Apps को अपने डिवाइस में इनस्टॉल करके रखते हैं लेकिन ये एप्प भी अपने आप में एक वायरस ही है जो आपके फ़ोन से बिना आपकी परमिशन आपकी निजी जानकारियां चुराते हैं और आपके फ़ोन को स्लो करते हैं और साथ ही ऐसे Apps आपके मोबाइल डाटा का इस्तेमाल करके आपका डेली इन्टरनेट यूजेज भी बाधा देते हैं. ऐसे में अगर आपको अपने फ़ोन से वायरस को दूर रखना है तो सिर्फ वही Apps इस्तेमाल करे जो Trusted हो एवं Smartphone Expert द्वारा Recommanded हो.

रेम क्लीनर स्पीड बढाता है – Android Phones अपने स्लो होने और हैंग होने की वजह से भी काफी बदनाम है. एंड्राइड एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम के मुकाबले ज्यादा RAM और ROM यूज़ करता है इस वजह से एंड्राइड फ़ोन जल्द ही स्लो और हैंग होने लगते हैं. इसी वजह से काफी लोग अपने मोबाइल में रेम क्लीनर एप्प इनस्टॉल कर लेते हैं और सोचते हैं की इससे उनके फ़ोन की स्पीड बढ़ेगी. लेकिन होता इससे उलट ही है. आपका फ़ोन फ़ास्ट होने के बजाय और ज्यादा स्लो हो जाता है क्यूंकि ऐसे Apps आपके फ़ोन के पप्रोसेसर पर विपरीत प्रभाव डालते हैं. क्यूंकि जब आप किसी App को इस्तेमाल नहीं करते तो वह बैकग्राउंड में फ्रीज़ हो जाता है और ये बहुत ही कम मात्र में मेमोरी लेते हैं. ये मेमरी रेम में कैश्ड हो जाती है ताकि अगली बार इन आप इन Apps को तेज़ी से ओपन कर सके लेकिन रेम क्लीनर के रेम क्लीन करने की वजह से फ़ोन को इन Apps को दुबारा से चालू करना पड़ता है जिससे आपका फ़ोन बहुत स्लो हो जाता है.

ज्यादा चार्जिंग मतलब बैटरी खराब – ये एक बहुत ही आम धारणा है जो आमतौर पर सभी स्मार्टफ़ोन यूजर के बिच प्रचलित हैं. हम और आप में से ज्यादातर लोग यही सोचते हैं की फ़ोन को ज्यादा चार्ज करने से उसकी बैटरी खराब हो जाती है लेकिन ऐसा होता कुछ नहीं है. ये बस मिथक से ज्यादा और कुछ नहीं. अगर आप स्मार्टफ़ोन यूज़ कर रहे हैं तो आपका स्मार्टफोन इतना स्मार्ट तो है की बैटरी फुल चार्ज होने के बाद अतिरिक्त आने वाले करंट को बैटरी तक न जाने दे. ऐसे में अगर आप पूरी रात अपना फ़ोन चार्जिंग में लगा के रखते हैं और आपको यह टेंशन रहती है कि इससे आपके फ़ोन की बैटरी खराब होगी तो ऐसा कुछ भी नहीं है. स्मार्टफोन बैटरी फुल चार्ज होने के बाद आने वाले करंट को बैटरी तक नहीं जाने देते ताकि उसकी सेहत पर कोई विपरीत प्रभाव ना हो. 

ज्यादा मेगापिक्सेल यानि ज्यादा बेहतरीन तस्वीर -  स्मार्टफोन का कैमरा ज्यादा मेगापिक्सेल का होने का मतलब यह नहीं की उससे ली जाने वाली फोटोज भी बेहतरीन क्वालिटी की होगी. दरअसल फोटोज और विडियो की क्वालिटी मेगापिक्सेल के अलावा और भी बहुत से कारको पर निर्भर करती हैं जिनका उनके ऊपर काफी प्रभाव पड़ता है. तो अपने मन में यह वहम कतई ना पाले की ज्यादा मेगापिक्सेल वाले फोन से ज्यादा अच्छी तस्वीर आएगी.

मल्टी-कोर प्रोसेसर यानि तेज़ स्मार्टफोन – जब भी स्मार्टफोन प्रोसेसर की बात आती है तो लोग मल्टी – कोर प्रोसेसर वाले फ़ोन को तरजीह देते हैं लेकिन आपको प्रोसेसर की क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए ना की उसकी क्वांटिटी पर. यदि आप एंड्राइड 8 कोर प्रोसेसर की तुलना iPhone 6के ड्यूल कोर प्रोसेसर से करेंगे तो पता चलेगा की आइफ़ोन तेज़ है.

उम्मीद है की स्मार्टफोन से जुड़े तथ्यों और मिथकों से जुड़ा यह आर्टिकल आपको जरुर पसंद आया होगा. इस आर्टिकल के बारे में अपने विचार कमेंट सेक्शन में जरुर रखे और और अगर आपको यह आर्टिकल informative लगा है तो इसे अपने फ्रेंड्स के साथ सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करे.

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